23 अक्टूबर 2026 |
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सर्व अनुसूचित जाति बस्तर एवं छत्तीसगढ़ युवा मंच ने पत्रवार्ता कर मांगा 50 लाख मुआवजा, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में देरी पर जताई नाराजगी

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OM Darpan

Oct 21, 2024 11:16 pm 267 views
सर्व अनुसूचित जाति बस्तर एवं छत्तीसगढ़ युवा मंच ने पत्रवार्ता कर मांगा 50 लाख मुआवजा, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में देरी पर जताई नाराजगी
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  AnyScanner_10_21_2024.pdf जगदलपुर (कौशल संदुजा)। सर्व अनुसूचित जाति जिला बस्तर और छत्तीसगढ़ युवा मंच ने संयुक्त रूप से बस्तर संभागीय आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा और पत्रवार्ता कर मृतक राम पाल यादव की मृत्यु के संबंध में एफ.आई.आर. के बाद भी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट लगभग दो माह बाद भी प्रस्तुत नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने मामले में गंभीरता से जांच कर तत्काल कार्यवाही करने और पीड़ित परिजनों को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिलाने की मांग की। सर्व अनुसूचित जाति बस्तर के जिला अध्यक्ष विक्रम लहरे और छत्तीसगढ़ युवा मंच के संस्थापक नरेन्द्र भवानी ने संयुक्त रूप से बस्तर संभागीय आयुक्त को ज्ञापन दिया और पत्रवार्ता कर मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि मृतक राम पाल यादव की मृत्यु के बाद अब तक कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई है, और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है। उन्होंने यह भी मांग रखी कि मामले की जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाए और मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। विक्रम लहरे और नरेन्द्र भवानी ने बताया कि पहले भी उन्होंने मृतक राम पाल यादव की मौत का विरोध दर्ज किया था और शहर के प्राइवेट बालाजी अस्पताल की लापरवाही के खिलाफ आंदोलन कर अस्पताल को बंद करवाने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि अस्पताल की लापरवाही के चलते राम पाल यादव की मृत्यु हो गई। विक्रम लहरे और नरेन्द्र भवानी ने जानकारी दी कि राम पाल यादव, जो पैर दर्द की शिकायत के बाद इलाज के लिए 21 अगस्त 2024 को डिमरापाल अस्पताल ले जाया गया था, वहाँ से रिफर कर जगदलपुर के बालाजी केयर (प्राइवेट) अस्पताल में 23 अगस्त 2024 को भर्ती कराया गया। चार दिन तक इलाज के बाद 28 अगस्त को बताया गया कि मरीज की किडनी खराब हो गई है और उसे आईसीयू में रखना होगा। इसके बाद मरीज की हालत बिगड़ती गई और 29 अगस्त को सुबह करीब 9 बजे डॉक्टर की लापरवाही के कारण उसकी मृत्यु हो गई। पत्रवार्ता में बताया गया कि मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी है। उन्होंने मांग की कि बालाजी केयर अस्पताल का लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाए और मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। भवानी और लहरे ने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता है तो वे संभाग के हर जिले में धरना प्रदर्शन करेंगे, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।  
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