- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक, जनप्रतिनिधित्व में हुआ विस्तार
रायपुर।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में शुक्रवार को मंत्रालय महानदी भवन में कैबिनेट की बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण, सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण, मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण और बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के पुनर्गठन आदेश में संशोधन को मंजूरी दी गई।
कैबिनेट ने इन पांचों प्राधिकरणों में जनप्रतिनिधित्व का दायरा बढ़ाते हुए, सभी मंत्रीगणों को सदस्य के रूप में शामिल किया है। इसके साथ ही संबंधित क्षेत्रों के राज्यसभा और लोकसभा सांसदों और जिला पंचायत अध्यक्षों को भी सदस्य बनाया गया है। प्रमुख सचिव/सचिव आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग के अधिकारियों को भी इन प्राधिकरणों का सदस्य बनाया गया है। शेष सभी सदस्य अपने पुराने पदों पर बने रहेंगे।
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण:
इस प्राधिकरण में मुख्यमंत्री अध्यक्ष होंगे और क्षेत्र के विधायक उपाध्यक्ष। पहले तीन विभागों के मंत्रियों को सदस्य के रूप में शामिल किया जाता था, लेकिन अब राज्य मंत्रिमंडल के सभी मंत्रीगण इसमें शामिल होंगे। राज्यसभा और लोकसभा सांसदों के साथ जिला पंचायत अध्यक्षों को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। प्रमुख सचिव/सचिव आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग भी प्राधिकरण के सदस्य होंगे।
सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण:
मुख्यमंत्री अध्यक्ष और क्षेत्र के विधायक (अ.ज.जा. आरक्षित) उपाध्यक्ष होंगे। सभी मंत्रीगण, सांसद और जिला पंचायत अध्यक्ष सदस्य होंगे। आदिवासी विकास से जुड़े समाजसेवियों और विशेषज्ञों को भी सदस्य के रूप में मनोनीत किया जाएगा।
अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण:
मुख्यमंत्री अध्यक्ष और विधायक (अ.जा. आरक्षित) उपाध्यक्ष होंगे। राज्य मंत्रिमंडल के सभी मंत्रीगण, सांसद और जिला पंचायत अध्यक्ष सदस्य होंगे। समाजसेवी और विशेषज्ञ भी सदस्य रहेंगे।
मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण:
मुख्यमंत्री अध्यक्ष और क्षेत्र के विधायक (अ.ज.जा. आरक्षित) उपाध्यक्ष होंगे। मंत्रिमंडल के सभी मंत्री, सांसद और जिला पंचायत अध्यक्ष सदस्य होंगे। समाजसेवी और विशेषज्ञ भी शामिल होंगे।
बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण:
मुख्यमंत्री अध्यक्ष और विधायक (अ.ज.जा. आरक्षित) उपाध्यक्ष होंगे। सभी मंत्रीगण, सांसद और जिला पंचायत अध्यक्ष सदस्य होंगे। आदिवासी विकास से जुड़े विशेषज्ञ भी प्राधिकरण में शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री के स्वेच्छानुदान मद से 262 व्यक्ति एवं संस्थाओं को 4 करोड़ 56 लाख 72 हजार रुपए की स्वीकृति दी गई। साथ ही प्रदेश में शहरी विकास नीति (टी.डी.एस.) का अनुमोदन किया गया, जिसमें भूखंडों के पुनर्गठन और शहरी विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु दिशा-निर्देश जारी करने का अधिकार आवास एवं पर्यावरण विभाग को दिया गया है।