23 अक्टूबर 2026 |
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जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब कुष्मांडा देवी ने अपने ईषत्‌ हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी : भाजपा किसान नेता अशवंत तुषार साहू

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OM Darpan

Oct 07, 2024 11:09 pm 310 views
जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब कुष्मांडा  देवी ने अपने ईषत्‌ हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी  :  भाजपा किसान नेता अशवंत तुषार साहू
मां कुष्मांडा की महिमा मां कुष्मांडा की महिमा   महासमुंद। जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक-2 में मां भगवती के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा का आशीर्वाद लेने के लिए विभिन्न ग्रामों में पूजा अर्चना का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ग्राम सिरपुर, खमतराई, मरोद, अमलोर, केरियाडीह, र्कराडीह, चुहरी, पासिद, रायकेरा, सुकुलबाय, अचानकपुर, बंदोरा, खिरसाली सहित अन्य गांवों के क्षेत्रवासियों ने जगत जननी से सुख-सौभाग्य और समृद्धि की प्रार्थना की। भाजपा किसान नेता अशवंत तुषार साहू ने भी इस पूजा में भाग लिया और क्षेत्र के लोगों से मिलकर उनकी कुशल क्षेम जानी। अशवंत तुषार साहू ने अपने उद्बोधन में कहा, “शास्त्रों के अनुसार मां कुष्मांडा ने अपनी मंद और हल्की हंसी के द्वारा अण्ड यानी ब्रह्मांड का निर्माण किया। जब सृष्टि का कोई अस्तित्व नहीं था, तब उन्होंने अंधकार से ब्रह्मांड की रचना की। यही कारण है कि उन्हें सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है।” उन्होंने आगे बताया कि मां कुष्मांडा की आठ भुजाएं हैं, और उनके सात हाथों में कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र और गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को प्रदान करने वाली जप माला है। उनका वाहन सिंह है और उन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है। भारतीय संस्कृति में कुम्हड़े को कुष्मांड कहा जाता है, जिससे इस देवी का नाम कुष्मांडा पड़ा। अशवंत तुषार साहू ने कहा, “मां कुष्मांडा का वास सूर्यमंडल के भीतर है, और यही उनके शरीर की कांति और प्रभा को सूर्य के समान दैदीप्यमान बनाती है। उनके तेज से दसों दिशाएं आलोकित हैं, और ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में उनका तेज व्याप्त है।”  
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