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भागवत कथा का समापन: मित्रता को लाभ-हानि के तराजू में न तौले - अशवंत तुषार साहू

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OM Darpan

Jan 04, 2025 12:29 am 390 views
भागवत कथा का समापन: मित्रता को लाभ-हानि के तराजू में न तौले - अशवंत तुषार साहू

महासमुंद। जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक-2 के ग्राम अछोली में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का समापन श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर भाजपा की सक्रिय सदस्य व किसान नेता अशवंत तुषार साहू विशेष रूप से उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर श्रीकृष्ण की लीलाओं का आनंद लिया। कथा के अंतिम दिन, पूज्य देवी प्रज्ञा जी ने श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता, श्रीकृष्ण के पूरे परिवार और राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा मनुष्य को सांसारिक भय और मोह से मुक्त करती है। जो व्यक्ति इस कथा को मनोभाव से सुनता है, वह अपने बंधनों से मुक्त होकर भगवान हरि के चरणों में स्थान प्राप्त करता है। समापन दिवस पर पूर्णाहुति हवन और महाप्रसादी का आयोजन किया गया। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने सात दिनों तक बहने वाली ज्ञान गंगा से लाभ लिया। इस आयोजन में पूर्व सरपंच संतराम साहू, टेशराम साहू, नोहर साहू, दीनदयाल, डूगैश साहू, मोहन साहू, दयाल निषाद और सरवन निषाद सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। अशवंत तुषार साहू ने कहा मित्रता को कभी भी लाभ-हानि के तराजू में नहीं तौलना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा हमें यह सिखाती है कि जीवन में सच्चे मित्रों का क्या महत्व होता है। श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता इसका श्रेष्ठ उदाहरण है। उन्होंने कथा के सफल आयोजन के लिए समस्त ग्रामवासियों और आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया। समापन के साथ ही कथा स्थल पर भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का गुणगान किया और भक्ति की गंगा में सराबोर हो गए। यह आयोजन पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय रहा और श्रद्धालुओं ने इसे सफल और भावपूर्ण बताया।
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