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टांगरगांव के आदिवासी किसानों को रेशम पालन से मिली समृद्धि, सालाना आय में भारी वृद्धि

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OM Darpan

Jan 09, 2025 01:07 am 433 views
टांगरगांव के आदिवासी किसानों को रेशम पालन से मिली समृद्धि, सालाना आय में भारी वृद्धि

जशपुरनगर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के टांगरगांव के आदिवासी किसान परशु राम, राजकुमार, सुभाधर व अगस्तुस ने रेशम विभाग की कोसा पालन योजना से अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। सालाना आय में भारी वृद्धि के कारण इन किसानों के बच्चों को अब बेहतर शिक्षा मिल रही है और उनकी जीवनशैली में सुधार हो रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नेतृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे रोजगार मूलक कार्यक्रमों में कोसा पालन योजना आदिवासी किसानों के लिए मील का पत्थर साबित हो रही है। रेशम विभाग द्वारा टांगरगांव में 05 हेक्टेयर भूमि पर साजा व अर्जुना के पौधे लगाए गए हैं, जिन पर कोसा कीट पालन कर ग्रामीण किसान अपनी आय में बढ़ोतरी कर रहे हैं। विभागीय अधिकारी श्याम कुमार ने बताया कि किसान इस योजना के तहत प्रति वर्ष लाखों की कमाई कर रहे हैं।

3000 DFL से 1.50 लाख रुपए की सालाना आय

रेशम पालन योजना के अंतर्गत, टांगरगांव के किसानों ने पिछले वर्ष 3000 डीएफएल (Disease Free Laying) का पालन किया, जिससे 151080 कोसाफल का उत्पादन हुआ। इस उत्पादन से कुल 5 लाख 20 हजार 680 रुपए की आमदनी हुई। चारों किसानों के समूह में प्रत्येक सदस्य को लगभग 1.50 लाख रुपए की सालाना आय प्राप्त हो रही है। किसान परशु राम, राजकुमार, सुभाधर और अगस्तुस ने बताया कि कोसा पालन शुरू करने से पहले वे मजदूरी के लिए अन्य राज्यों में जाते थे, जहां से उन्हें सालभर में मुश्किल से 30-35 हजार रुपए की बचत हो पाती थी। इस आय से परिवार का भरण-पोषण करना कठिन था। रेशम विभाग की कोसा पालन योजना से जुड़ने के बाद अब उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो गई है।

रेशम पालन बना पलायन रोकने का जरिया

रेशम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कोसा पालन योजना ने जशपुर जिले के आदिवासी इलाकों में रोजगार के नए अवसर प्रदान किए हैं। इस योजना के कारण मजदूरी के लिए अन्य राज्यों में होने वाला पलायन लगभग 75% तक कम हो गया है। अब किसान गांव में रहकर अच्छी कमाई कर रहे हैं और अपने परिवार को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। परशु राम ने बताया, "हम पहले मजदूरी के लिए बाहर जाते थे, लेकिन अब हमें अपने गांव में ही रोजगार मिल रहा है। कोसा पालन से हमें अच्छी आमदनी हो रही है। हम अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ा रहे हैं और पक्का मकान भी बना लिया है। पहले बच्चे अच्छे कपड़े पहनने को तरसते थे, लेकिन अब हर जरूरत पूरी हो रही है।"

रेशम विभाग की पहल से बदल रही तस्वीर

रेशम विभाग के अधिकारी श्याम कुमार ने कहा कि विभाग की यह योजना आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि लाने का काम कर रही है। टांगरगांव जैसे दूरस्थ इलाकों में जहां पहले लोग मजदूरी के लिए पलायन करते थे, अब वे कोसा पालन कर अपनी आमदनी को दोगुना कर रहे हैं। इस योजना से न केवल आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि किसानों का जीवन स्तर भी सुधर रहा है। रेशम विभाग का यह प्रयास उन किसानों के लिए एक नई दिशा लेकर आया है, जो कभी गरीबी की जकड़न में थे। आज वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होकर अपने परिवार को बेहतर भविष्य दे रहे हैं।

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