छत्तीसगढ़ में कमजोर डोमिसाइल नीति से संकट में जल, जंगल, जमीन और रोजगार
OM Darpan
दुर्ग (रोहितास सिंह भुवाल)।
छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूरन लाल साहू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि छत्तीसगढ़ में कमजोर डोमिसाइल नीति के चलते छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ियों का अस्तित्व खतरे में है। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में मजबूत डोमिसाइल नीति होने के कारण वहां के निवासियों की स्थिति बेहतर है, जबकि छत्तीसगढ़ में बाहरी लोग आसानी से जाति निवासी प्रमाण पत्र बनवाकर यहां के संसाधनों पर अधिकार जमा लेते हैं।
पूरन लाल साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जल, जंगल, जमीन और रोजगार लगातार मूल निवासियों के हाथ से निकलते जा रहे हैं। 1947 में भारत की आजादी के बाद 1951 में पहली जनगणना हुई थी, उसी आधार पर राज्य में डोमिसाइल नीति लागू होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि 1951 की जनगणना के आधार पर ही मूलनिवास प्रमाण पत्र जारी किया जाए और संसाधनों पर पहला हक छत्तीसगढ़ियों का हो।
छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच की प्रमुख मांगें
पूरन लाल साहू ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा, तथा छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत को पत्र लिखकर निम्नलिखित मांगें रखी हैं—
- डोमिसाइल नीति 1951 की जनगणना के आधार पर लागू की जाए।
- राज्य के 90% संसाधनों पर पहला हक मूल छत्तीसगढ़ियों को मिले।
- गैर-छत्तीसगढ़ियों द्वारा कृषि भूमि खरीदने पर रोक लगे।
- उद्योगों में ठेकेदारी प्रथा को समाप्त किया जाए।
- सरकारी कर्मचारियों की तरह उद्योगों में कामगारों को पेंशन दी जाए।
- मजदूरों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड की तर्ज पर मजदूर क्रेडिट कार्ड जारी किया जाए, जिससे बिना ब्याज के ₹5 लाख तक का ऋण मिले।
- काम के दौरान हादसे में मजदूरों की मृत्यु पर ₹50 लाख का मुआवजा दिया जाए।
- छत्तीसगढ़ के युवाओं को उनकी शिक्षा के आधार पर रोजगार की गारंटी मिले।
पूरन लाल साहू ने कहा कि यदि राज्य सरकार ने जल्द मजबूत डोमिसाइल नीति नहीं बनाई, तो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ियों के हक पर पूरी तरह से बाहरी लोगों का कब्जा हो जाएगा। उन्होंने राज्य सरकार से छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
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