"वंदे मातरम्" गीत के रचना के 150 वर्ष पूरे, सामूहिक गायन से हुडको का प्रांगण गूंज उठा
OM Darpan
Jan 28, 2025 06:55 am
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28 Jan 2025
दुर्ग (रोहितास सिंह भुवाल)।
राष्ट्रभक्ति और चेतना का प्रतीक, "वंदे मातरम्" गीत, राष्ट्र सेविका समिति द्वारा आयोजित सामूहिक गायन कार्यक्रम के साथ एक बार फिर जन-जन तक पहुँचाया गया। इस वर्ष "वंदे मातरम्" की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर, दुर्ग के हुडको प्रांगण में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।
मुख्य अतिथि माननीया साध्वी हरि ओम जी का आशीर्वाद और सानिध्य प्राप्त हुआ, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में माननीय सतीश गोकुल पंडा जी, प्रांत जनजाति कार्य प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, छत्तीसगढ़ ने वंदे मातरम् के इतिहास, अर्थ और महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा, "वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह माँ भारती के प्रति एक दिव्य भाव है, जो भारतीयों में राष्ट्रभक्ति की भावना को जागृत करता है।" सतीश गोकुल पंडा जी ने आगे बताया कि यह गीत महज बंगाल तक सीमित नहीं था, बल्कि यह सम्पूर्ण भारत के स्वतंत्रता सेनानियों को बलिदान की ओर प्रेरित करता था।
वंदे मातरम् की रचना, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा की गई थी, और इसका जन्म एक दर्दनाक घटना से हुआ, जब उन्हें भूखों मरते किसानों और ब्रिटिश सरकार द्वारा लगान न चुका पाने पर दी गई सजा को देखकर व्यथित किया।रविंद्रनाथ ठाकुर ने सबसे पहले 1896 में इसे गाया था, और इसके बाद यह गीत स्वतंत्रता संग्राम का अमिट हिस्सा बन गया। इसके बाद यह गीत हर कांग्रेस अधिवेशन में गाया जाने लगा और भारत के प्रत्येक नागरिक के हृदय में बस गया। इस कार्यक्रम में राष्ट्र सेविका समिति, छत्तीसगढ़ प्रांत की कार्यवाहिका श्रीमती प्राजक्ता देशमुख जी, प्रांत सह कार्यवाहिका श्रीमती अजिता गनोदवाले जी एवं दुर्ग विभाग की कार्यवाहिका श्रीमती राखी विश्वास जी सहित अन्य सेविकाएँ उपस्थित थीं। लगभग 500 देशभक्तों ने सामूहिक गायन से वंदे मातरम् का गायन किया, जिससे पूरा वातावरण गूंज उठा। सभी उपस्थित जनमानस ने वंदे मातरम् के शब्दों को विभिन्न भाषाओं में लिखकर इस भावना को और भी सशक्त किया।
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