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लाल किले में गूंजा ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’, यूनेस्को मंच पर गेड़ी नृत्य ने मोहा 180 देशों का मन

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OM Darpan

Dec 16, 2025 05:49 am 423 views
लाल किले में गूंजा ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’, यूनेस्को मंच पर गेड़ी नृत्य ने मोहा 180 देशों का मन

  • अंतर्राष्ट्रीय समारोह: बिलासपुर के 'लोक श्रृंगार भारती' दल की प्रस्तुति देख थिरके विदेशी मेहमान, केंद्रीय मंत्री ने की तारीफ

नई दिल्ली/रायपुर.

देश की राजधानी नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला प्रांगण में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का डंका बजा है। यूनेस्को और केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय समारोह में बिलासपुर की संस्था ‘लोक श्रृंगार भारती’ के कलाकारों ने गेड़ी नृत्य का ऐसा समां बांधा कि वहां मौजूद 180 देशों के प्रतिनिधि मंत्रमुग्ध हो गए।

7 से 13 दिसंबर तक चले इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने अपनी साहसिक और लयबद्ध प्रस्तुति से अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रदेश का मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर दल को बधाई दी है।

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'छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया' के उद्घोष से गूंजा प्रांगण

समारोह का सबसे यादगार पल वह रहा जब केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। गेड़ी नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति और कलाकारों का संतुलन देख वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने मंच से ही “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” का नारा दिया। यह आयोजन इसलिए भी ऐतिहासिक रहा क्योंकि इसी मंच पर यूनेस्को द्वारा भारत के महापर्व दीपावली को ‘विश्व सांस्कृतिक धरोहर’ के रूप में मान्यता प्रदान की गई।

गेड़ी पर मानवीय पिरामिड देख थमी सांसें

मुख्य गायक और नृत्य निर्देशक अनिल गढ़ेवाल के नेतृत्व में दल ने ऊर्जावान प्रदर्शन किया। दर्शकों का रोमांच तब चरम पर पहुंच गया जब कलाकारों ने ऊंचे बांस (गेड़ी) पर संतुलन बनाते हुए जटिल मानवीय संरचनाएं बनाईं।

  • संगीत का जादू: मुख्य गायक अनिल गढ़ेवाल के गीत “काट ले हरियर बांसे” और मांदल वादक मोहन डोंगरे के थिरकते वादन ने विदेशी मेहमानों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

  • कलाकार: हारमोनियम पर सौखी लाल कोसले और बांसुरी पर महेश नवरंग ने संगत दी। वहीं नर्तक प्रभात बंजारे, सूरज खांडे, शुभम भार्गव, लक्ष्मी नारायण माण्डले, फूलचंद ओगरे और मनोज माण्डले ने साहसिक करतब दिखाए।

यूनेस्को डीजी ने कलाकारों संग खिंचाई फोटो

छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वेशभूषा—कौड़ियों, चीनी मिट्टी की मालाएं, पटसन के वस्त्र और मयूर पंख—ने विदेशी डेलिगेट्स के बीच गहरी उत्सुकता पैदा की। यूनेस्को के महानिदेशक डॉ. खालिद एन. एनानी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की उपस्थिति में कलाकारों का सम्मान बढ़ा। कार्यक्रम के बाद यूनेस्को डीजी सहित कई देशों के प्रतिनिधियों ने गेड़ी दल के साथ स्मृति चित्र (फोटो) लिए और छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला की सराहना की।

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